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घर आई लली

Posted On: 5 Jul, 2013 Others,social issues,कविता में

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घर आई लली
गाओ सखी सब मिलकर बधाई।
बड़े भाग्य से हमारे घर लली आई।।
अंगना में चमके दमके हमार लली।
तात कहते फिरें,घर लछमी आई।
भाग्य जगे हमार घर लली आई।।
मुँह फुलाये दादी माँ द्वारे बैठी थी।
दादा बोले, कभी तू भी लली थी।।
आँखों से कह रही बेटी लेटे पलना।
मुझे पढाना, सुसंस्कारों में ढालना।।
मैं मान-सम्मान करू सभी का।
मुझे मान-सम्मान मिले सभी का।।
गुणगान हों मेरे, जहाँ भी रहूँ मैं।
सौभाग्य जगें, जहाँ भी रहूँ मैं।।
मुझे जीवनभर, देवी सा मान मिले।
माँ मुझे ऐसा आशीरवाद मिले।।
दादा बोले————–
बेटी होती है कुल की लाज-हया।
सभाल कर रखना यह कोमल कली।।
अति प्यार में भूल न जाये सुसंस्कार।
अपनी जिम्मेदारी मानो, पाये लली सुसंस्कार।।
भूल न जाये कुल की मरयादा लली।
स्वास्थ,सुन्दर पढी़-लिखी हो हमार लली।।

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1 प्रतिक्रिया

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bdsingh के द्वारा
November 28, 2013

धन्यवाद।


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