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कनक सी कनपुरिया

Posted On: 2 Aug, 2013 Others,social issues,कविता में

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कनक सी कनपुरिया
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जय हो कानपुर की कनक सी कनपुरिया।
गरीब का पोषण करती दिल खोल कर।
बन्द हुए मिल कामगारों का दिल तोड़ कर।।
जय हो कानपुर की कनक सी कनपुरिया।
धो डाला माथे से कलंक कानपुर।
जो अस्वच्छता का प्रतीक था कानपुर।।
जय हो कानपुर की कनक सी कनपुरिया।
धुनाई किया मेन्सन की अल्हण मणिकणिका।
अंग्रेजों को चकित किया अल्हण मणिकणिका।।
जय हो कानपुर की कनक सी कनपुरिया।
मंदिर,मस्जिद,गुरूव्दारों में आस्था के पट खोले कानपुर।
हरीओम,अल्ला हू ,वाह रे गुरू की धुन बोले कानपुर।।
जय हो कानपुर की कनक सी कनपुरिया।

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