Samajik Vedna

Just another weblog

30 Posts

69 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15128 postid : 589430

गरीब की वेदना

Posted On: 30 Aug, 2013 Others,social issues,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

गरीब की वेदना (कविता में)
दिनकर की सुर्ख आँखों के सामने, दिनभर।
अपनी बेरहम गरीबी से, लाचार होकर।।
बिना चिंता किये,परिश्रम करता है जाता।
कभी अपनी इज्जत, नीलाम कर है जाता।।
तन के पट तार-तार, लेकिन नहीं है खबर।
गरीब को गरीबी क्या-क्या दिन दिखायेगी।।
चलते-फिरते सुनता है,लोगों की झिड़क।
कभी तिलमिला जाता है,सुनकर झिड़क।।
अपने दामन में लाचारी को छिपाकर ।
रह जाता है अपनी दिखावटी मुस्कान दिखाकर।।
कोसता है गरीब , कभी-कभी निज को।
व्यक्त करता है,कभी अपने उग्र भावों को।।
लेकिन भयभीत रहता है, उन क्षणों में।
दिल मसोस कर रह जाता है उन क्षणों में।।
अपनी बहन- बेटियों की इज्जत लुट जाने पर।
विवसता में जीने को होता है मजबूर।
व्यथित होता है,अपने को असहाय पाकर।।
मौन हो जाता है,दुःखों का सागर देखकर।।
गरीबी  से मुक्ति—-
अमीर अपनी विलासिता का एक दिन दे जाय।
गरीब के तीस दिन की रोटी का जुगाड़ हो जाय।।
अगर उसके परिश्रम का, पूरा दाम मिल जाय।
तो उसके जीवन का सारा,दरिद्र मिट जाय।।
धर्म के नाम पर,कारोबार बन्द हो जाय।
तो देश में गरीबी का नामो-निशान मिट जाय।।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
September 17, 2013

बी.डी.सिंह जी ,आपके द्वारा रचित ”गरीब की वेदना” एक गरीब की जिन्दगी के उन दुखद अनछुए पहलुओं को उजागर करती है ,जिनसे उसे जूझना व् सहना पड़ता है, इस सुन्दर रचना की एक बात अच्छी लगी की कविता के माध्यम से कुछ महत्त्व पूर्ण उपाय भी दिए हैं…काश ; ये सुझाव कामयाब हो जाएँ ,तो देश के लाखों गरिवों का भला हो जाएगा …धन्यवाद …

    bdsingh के द्वारा
    September 17, 2013

    सुषमा जी,आपकी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। आपने कविता की प्रत्येक पंक्ति पर  ध्यान दिया ,प्रसंन्नता हुई।

udayraj के द्वारा
September 2, 2013

बहुत सही महोदय , अगर गरीबों के परिश्रम का उचित दाम मिल जाए तो उन्हेंद दो वक्तो के भोजन के लिए खाद्य सुरक्षा बिल की जरुरत ही नहीं होगी , जरुरत है उनका हो रहा शोषण खत्म किया जाए ।

    bdsingh के द्वारा
    September 2, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपको।

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
September 2, 2013

प्रतिक्रया के द्वारा मेरा उत्साह्बर्धन के लिए धन्यवाद /

    bdsingh के द्वारा
    September 2, 2013

    युवा हो ,आपको मेरी शुभकामनयें।

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
September 2, 2013

गरीबी का सुन्दर चित्रण किया है आपने / बहुत खूब /

    bdsingh के द्वारा
    September 2, 2013

    गरीबी के चित्रण की प्रशंसा के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

jlsingh के द्वारा
August 31, 2013

अमीर अपनी विलासिता का एक दिन दे जाय। गरीब के तीस दिन की रोटी का जुगाड़ हो जाय।। अगर उसके परिश्रम का, पूरा दाम मिल जाय। तो उसके जीवन का सारा,दरिद्र मिट जाय।। धर्म के नाम पर,कारोबार बन्द हो जाय। तो देश में गरीबी का नामो-निशान मिट जाय।। बेहतरीन !

    bdsingh के द्वारा
    August 31, 2013

    मेरी पंक्तियों से सहमति जता कर प्रशंसा के लिए बहुत बहुत  धन्यवाद।मेरे ब्लाग पर आए बहुत खुशी हुई।


topic of the week



latest from jagran