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आई पिया की याद

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आई पिया की याद
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रिम-झिम रिम-झिम बरस रही बरखा रानी।
देख के बरखा मदहोश हुई जवानी।।
एक बूँद पानी को तरस रही तरूणी।
जैसे प्यासी सात जनमों की तरूणी।।
पिया की याद में रहती खोई-खोई।
बीते घनेरी रात अध सोई-सोई।।
वो बात करे पायल की झंकारों से।
चकित होती पिया आने की आहट से।।
कहने को खड़े है बड़े-बड़े वृक्ष यहाँ।
पर तुम्हारे बिन वो शीतल छाया कहाँ।।
तड़प रहा मेरा जिया अब आजा पिया।
तुम्हारे मिलन को है बेकरार जिया।।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
October 26, 2013

सिंह जी नमस्कार / आग यदि ईधर लगी है इस बारिश में तो उधर भी कोई कम नहीं / अच्छी रचना /

    bdsingh के द्वारा
    October 26, 2013

    आपको  भी नमस्कार, राजेश  जी। आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी, धन्यवाद।

October 25, 2013

सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति .बधाई

    bdsingh के द्वारा
    October 26, 2013

    बहुत बहुत  धन्यवाद।


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