Samajik Vedna

Just another weblog

30 Posts

69 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15128 postid : 642678

धर्म की ओट में ठगी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जन-जन को भरमाते फैला कर अपना छल।
खाकर हलुआ पूड़ी अपनी तोंद बढ़ाते।।
कथावाचक कह रहा बैठ कर सुन लो कथा।
देकर निज सारा धन दूर कर लो निजव्यथा।।
हम बैठे हित करने जान समझ लो निज हित।
सब कुछ दे जाओ तुम स्वर्ग-व्दार न मिले सेत।।
धर्म के मठाधीश जो बढा रहे फरेब को।
बनकर धर्म-सेवक लूट रहे जन-जन को।।
प्रपंची वचनों से करते शोषण जन का।
खुद वैभव में रह कर देते शिक्षा सादगी का।।
धर्म-तन्त्र सो रहा यौवन की गलियों में।
बचा क्षण तो सो गये दौलत के ढेरों में।।
भारत की युवा शक्ति ठोकर खाती रही भटक।
भोग विलासी शोषक जनता में रहा खटक।।
सत्य की ही जीत हो अधर्मी का नाश हो।
मनुज नतमस्तक हो जब प्रतिभा सम्मुख हो।।
धार्मिक कर्मकाण्डों का सम्पादन है समुचित।
जो आदिशक्ति के प्रति करें श्रद्धा विकसित।।
धर्म के नाम हो रहा व्यवसाय बन्द हो जाय।
तो देश की गरीबी का नाम ही मिट जाय।।

अंधविश्वास व कुरीतियों का धर्म में कोई स्थान न दिया जाय,तभी  धर्म जन -कल्याण में सहायक सिद्ध होगा।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
November 11, 2013

wah उम्दा लेखन

    bdsingh के द्वारा
    November 12, 2013

    आपको बहुत बहुत धन्यवाद।ब्लाग पर आये,लेखन की प्रशंसा पढ़ कर प्रसन्नता हुई।

November 9, 2013

पर ये ठगी बंद होनी मुश्किल है क्योंकि लोग ही ये नहीं चाहते .सुन्दर अभिव्यक्ति सार्थक प्रयास .

    bdsingh के द्वारा
    November 10, 2013

    आपने सही कहा,आम जनता अंधविश्वासी है। आत्म बल की कमी  एवं अज्ञाननता का ठग लाभ उठाता है। सार्थक बताया, मन को संतोष हुआ। धन्यवाद।


topic of the week



latest from jagran