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चरित्र-पतन

Posted On: 13 Dec, 2013 Others,social issues,कविता,Junction Forum में

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चरित्र-पतन
मादक उन्माद का उठा बवंडडर।
देखो यौनि शब्द का हाहाकार।।
भूल गये मात-पिता का रिलेशन।
केवल याद रहा लिब इन रिलेशन।।
उम्र भूल कर करती भूल नजरें।
देखो यौवन पर टिकी हैं नजरें।।
देखा था देवी रूप नारी में।
ढूंढ रहा टी आर पी उसी में।।
वाह रे नर वाह रे सोच तेरी।
सम्पदा के लिए मत गयी मारी।।
साम हुई लौटो घर मानों बात।
नहीं तो घेर लेगी घनेरी रात।।

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
December 13, 2013

बहुत खूब / बहुत खूब /

    bdsingh के द्वारा
    December 13, 2013

    धन्यवाद, राजेश जी।


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